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कोंकण रेलवे
2018-04-12 12:31कोंकण रेलवे
कोंकण रेलवे

कोंकण रेलवे

कोंकण रेलवे भारत की वाणिज्य राजधानी मुंबई और मंगलोर को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी थी | 741 कि.मी. लंबी यह लाइन महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक राज्यों को जोड़ती है जो एक ऐसा क्षेत्र है जहां आर-पार बहती नदियां, गहरी घाटियां और आसमान छूते हुए पहाड़ हैं । कोंकण जमीन की एक तटवर्ती पट्टी भी है जहां पूर्व में सह्याद्रि पर्वतमाला और पश्चिम में अरब महासागर है । यह ऐसी भूमि है जो कई पौराणिक गाथाओं से जुड़ी है और जहां आर्थिक खुशहाली भी है और जहां प्रचुर मात्रा में खनिज स्रोत, घने वन तथा धान, नारियल और आम के पेड़ों से भरे हरे-भरे मैदान हैं ।

इतनी बड़ी परियोजना के लिए गहन सर्वेक्षणों की जरूरत थी । इस दिशा में पहला प्रयास 1970 की शुरूआत में किया गया । 1971 से 1973 के बीच सरसरी तौर पर मंगलोर तक का सर्वेक्षण किया गया तथा 1975 से 1977 के बीच दासगांव से रत्नागिरी तक का गहराई से सर्वेक्षण किया गया । अक्तूबर, 1984 में रेल मंत्रालय द्वारा मध्य रेल को रोहा और मंगलोर को दक्षिण रेलवे के साथ जोड़ने के लिए पश्चिमी समुद्र तटीय लाइन के लिए अंतिम लोकेशन इंजीनियरी-कम –यातायात सर्वेक्षण के लिए प्राधिकृत किया गया । प्रारंभ में मडगांव से मंगलोर तक 325 कि.मी. के हिस्से का सर्वेक्षण किया गया तथा मार्च 1985 में इस लाइन की शेष लंबाई का विस्तार किया गया।

दक्षिण रेलवे, जिसे इस सर्वेक्षण का काम सौंपा गया था उसने जुलाई, 1988 में मंत्रालय को कोंकण रेलवे पर अपनी रिपोर्ट पेश की । उनकी रिपोर्ट में माल यातायात और सवारी-यातायात के प्राक्कलनों को शामिल किया गया तथा बढ़ती हुई अर्थ-व्यवस्था में साफ तौर पर इस नई रेल लाइन की जरूरत को साबित किया गया ।

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पूर्व रेलवे का मुख्यालय : सीबीडी बेलापुर, नवी मुंबई।

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