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कालका - शिमला
2018-04-12 12:31कालका - शिमला
कालका - शिमला

कालका शिमला रेलवे

ब्रिटिश शासन की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को कालका से जोड़ने के लिए 1896 में दिल्ली अंबाला कंपनी को इस रेलमार्ग के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समुद्र तल से 656 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालका (हरियाणा) रेलवे स्टेशन को छोड़ने के बाद ट्रेन शिवालिक की पहाड़ियों के घुमावदार रास्ते से गुजरते हुए 2,076 मीटर ऊपर स्थित शिमला तक जाती है। 24 जुलाई 2008 को इसे युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया।

दो फीट छह इंच की इस नैरो गेज लेन पर नौ नवंबर, 1903 से आजतक रेल यातायात जारी है। कालका-शिमला रेलमार्ग में 103 सुरंगें और 869 पुल बने हुए हैं। इस मार्ग पर 919 घुमाव आते हैं, जिनमें से सबसे तीखे मोड़ पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। इस मार्ग में निर्मित सुरंगें व पुल इस लाइन को और अधिक महत्व देते है। सभी सुरंगें 1900 और 1903 के बीच बनी है और सबसे लम्बी सुरंग बड़ोग सुरंग है जोकि 1 कि.मी. से अधिक लम्बी है। 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा की कछुए की रफ़्तार से चलने वाली इस ट्रैन में बैठकर आप हिमाचल के प्रारंभिक पर्वतों को करीब से तथा इत्मीनान से निहारने का मौका पा सकते हैं। यह ट्रैन कालका से शिमला के 96 किलोमीटर के सफ़र को 6 से 7 घंटे में तय करती है।

ट्रेन किराया:

  • रु. 270/- प्रथम श्रेणी में
  • रु. 25/- जनरल
  • डेक्कन ओडिसी ट्रेन
  • महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन
  • पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन
  • गोल्डन चेरियट ट्रेन
  • रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स
  • दार्जिलिंग हिमालयी रेल
  • कालका शिमला रेल
  • कांगड़ा वैली रेल
  • माथेरान लाइट रेलवे
  • नीलगिरि माउंटेन रेलवे